मौजूदा Tariff विवाद ने India-United States रिश्तों की परीक्षा जरूर ली है, लेकिन दोनों नेताओं (Trump & Modi) के व्यक्तिगत संबंध और रणनीतिक हित यह संदेश देते हैं कि साझेदारी में स्थायी दरार की संभावना नहीं है।
उन्नत केसरी
नई दिल्ली। अमेरिका और भारत के रिश्ते इस समय गंभीर तनाव से गुजर रहे हैं। रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर अमेरिका ने भारत के निर्यात पर 50 प्रतिशत का ऊँचा टैरिफ लगा दिया है, जिससे कपड़ा, ज्वेलरी, फुटवियर, समुद्री उत्पाद और रसायन जैसे उद्योग प्रभावित हो रहे हैं। इसके साथ ही रुपये में भी रिकॉर्ड गिरावट आई और पूँजी बाजार से विदेशी निवेशकों की निकासी तेज हुई।
हालाँकि इस टकराव के बीच भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रिश्तों को मजबूत बताने की कोशिश की है। ट्रंप ने शुक्रवार (5 सितंबर) को ओवल ऑफिस में कहा, “मैं हमेशा (नरेंद्र) मोदी का दोस्त रहूँगा। वह एक महान प्रधानमंत्री हैं। भारत और अमेरिका का रिश्ता विशेष है। कभी-कभी हमारे बीच ऐसे पल आते हैं, लेकिन चिंता की कोई वजह नहीं है।”
ट्रंप ने यह भी जोड़ा कि उन्हें “बहुत निराशा” है कि भारत रूस से इतना अधिक तेल खरीद रहा है और इसी कारण 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है। हाल ही में उनके ट्रुथ सोशल पोस्ट में यह टिप्पणी कि “हमने भारत और रूस को चीन के साथ खो दिया” काफी विवाद का कारण बनी थी, लेकिन अब उन्होंने नरम रुख अपनाते हुए रिश्तों को विशेष करार दिया है।
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प्रधानमंत्री मोदी ने भी ट्रंप की इस टिप्पणी का स्वागत करते हुए कहा कि वह इसे “गहराई से सराहते हैं” और भारत-अमेरिका साझेदारी को “व्यापक और वैश्विक रणनीतिक” करार देते हैं।
इस बीच केंद्र सरकार ने अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित उद्योगों के लिए राहत पैकेज तैयार करने की घोषणा की है। निर्यातकों को क्रेडिट गारंटी और टैक्स इंसेंटिव जैसे उपाय दिए जाएंगे। साथ ही, घरेलू खपत को बढ़ावा देने के लिए सैकड़ों उपभोक्ता वस्तुओं पर जीएसटी दरों में कटौती और टैक्स ढाँचे को सरल किया गया है।
हालाँकि कूटनीतिक तनाव और आर्थिक दबाव बने हुए हैं, विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि ऊर्जा खरीद भारत की संप्रभुता और राष्ट्रीय हित से जुड़ा विषय है और रूस से तेल आयात जारी रहेगा।

