श्री योग अभ्यास आश्रम, हांसी का 31वाँ वार्षिक उत्सव श्रद्धा एवं उत्साह के साथ सम्पन्न
हांसी। मुल्लान नगर स्थित श्री योग अभ्यास आश्रम में रविवार को 31वाँ वार्षिक उत्सव श्रद्धा, भक्ति एवं उत्साह के साथ आयोजित किया गया। इस अवसर […]
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Read moreवैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक कुरुक्षेत्र: कुरुक्षेत्र लोकसभा हरियाणा से इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार डा. सुशील गुप्ता,अध्यक्ष आप हरियाणा प्रदेश के समर्थन में भारी संख्या में […]
Read moreवैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक कुरुक्षेत्र 28 फरवरी गीतिका बंसल: श्री जयराम महिला कालेज ऑफ एजुकेशन की छात्राओं द्वारा कुरुक्षेत्र जिले के विभिन्न स्कूलों में चल […]
Read moreऑस्ट्रेलिया संवाददाता – विनायक कौशिक ऑस्ट्रेलिया, 28 फरवरी: भारतीय युवा आज अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं तथा देश का नाम […]
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Read moreवैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक कुरुक्षेत्र 27 फरवरी गीतिका बंसल: देशभर में संचालित श्री जयराम संस्थाओं के परमाध्यक्ष एवं श्री जयराम शिक्षण संस्थान के चेयरमैन ब्रह्मस्वरूप […]
Read moreवैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक कुरुक्षेत्र, 27 फरवरी: प्रेरणा वृद्धाश्रम में बुजुर्गों एवं संस्था के पदाधिकारियों द्वारा चंद्रशेखर आजाद की पुण्यतिथि बड़े श्रद्धा भाव के साथ […]
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Read more-डॉ. अशोक कुमार वर्मा आज भागदौड़ के साथ साथ प्रतिस्पर्धा के युग में मनुष्य कब तनाव में चला जाता है इसका पता ही नहीं लगता।अनेक बार व्यक्ति सफलता की सीढ़ियों के बिल्कुल निकट पहुंचकर भी फिसल जाता है और तब आरम्भ होता है अवसाद का दौर और नशे की और आकर्षण।यदि ऐसे समय में कोई सँभालने वाला न हो तो मनुष्य किसी भी कुमार्ग पर जा सकता है। आज एक ऐसे युवक की कहानी आपको बताता हूँ जो एक निजी विद्यालय में शिक्षक था और कोरोना के समय के कुछ समय पश्चात नौकरी छूट गई सरकारी नौकरी के लिए प्रयास किया और वहां पर भी अंतिम चरण में असफल होने पर बहुत दुःख हुआ और अवसाद एवं तनाव को कम करने के लिए नशे का शिकार हो गया।घर वालों ने बहुत समझाया लेकिन उनकी एक न चली। नशे की लत में वह नशीले टीके तक लगाने लगा था। घर वालों ने निजी संस्थानों में बहुत उपचार भी करवाया लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ बल्कि तन-मन और धन का शोषण हुआ। और एक दिन ऐसा आया कि ड्रग्स ने उसके प्राण हर लिए। एक ऐसे युवक के जीवन का अंत हुआ जो स्वयं एक शिक्षक था।जो अन्य लोगों के जीवन में प्रकाश करने का कार्य करता था लेकिन नशे ने उसे एक स्थिति में खड़ा कर दिया था। उस युवक ने नौकरी न मिलने के कारण नशे को अपना साथी बना लिया था।ये कहानी न केवल उस युवक की है जिसने नशे में पड़कर अपने जीवन को समाप्त किया अपितु और भी ऐसे बहुत युवक हो सकते हैं जो असफलता के कारण नशे का शिकार हो जाते हैं।आज इस बात की आवश्यकता है कि शिक्षा नीति में नैतिक मूल्यों पर आधारित शिक्षा प्रणाली को जोड़ा जाए और प्रत्येक कक्षा के पाठ्यक्रमों में स्थान दिया जाए।इतना ही नहीं नशे का शिकार हो चुके लोगों के पुनर्वास की सुव्यवस्था की जाए।
Read moreफरीदाबाद/सूरजकुडं, 01 फरवरी भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की सचिव वी.मनीषा ने कहा कि 37वां सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेला-2024, 02 फरवरी से 18 फरवरी, 2024 […]
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