भारतीय वैज्ञानिकों का पूरी दुनिया में वर्चस्व : डॉ. राज नेहरू

वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक पलवल: श्री विश्वकर्मा कौशल विद्यालय के कुलपति डॉ. राज नेहरू ने कहा कि विज्ञान का हमारे जीवन में बहुत महत्व है। […]

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विदेश में जाकर भी अध्यात्म की गंगा बहा रहे हैं भारतीय

वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक कुरुक्षेत्र 27 फरवरी विषेश संवाददाता विनायक कौशिक: विदेश में जाकर भी भारतीय अपनी परम्पराओं एवं संस्कारों के साथ अध्यात्म को नहीं […]

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जयराम महिला बी.एड कालेज की छात्रा यामिनी ने खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में स्वर्ण पदक जीता

वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक कुरुक्षेत्र 27 फरवरी गीतिका बंसल: देशभर में संचालित श्री जयराम संस्थाओं के परमाध्यक्ष एवं श्री जयराम शिक्षण संस्थान के चेयरमैन ब्रह्मस्वरूप […]

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प्रेरणा वृद्धाश्रम में मनाई गई चंद्रशेखर आजाद की पुण्यतिथि

वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक कुरुक्षेत्र, 27 फरवरी: प्रेरणा वृद्धाश्रम में बुजुर्गों एवं संस्था के पदाधिकारियों द्वारा चंद्रशेखर आजाद की पुण्यतिथि बड़े श्रद्धा भाव के साथ […]

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परिवार पहचान पत्र लक्ष्यीकरण के सर्वेक्षण में आमजन करें अधिकारियों का सहयोग : डा. वैशाली

वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक कुरुक्षेत्र, 23 फरवरी: अतिरिक्त उपायुक्त डा. वैशाली शर्मा ने कहा कि वर्तमान परिदृश्य के अनुसार विभिन्न विभागों जिनमें रोजगार, एडीआईटी, पशुपालन […]

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असफलता के कारण नशे की लत ने ली एक युवक की जान -डॉ. अशोक कुमार वर्मा

-डॉ. अशोक कुमार वर्मा आज भागदौड़ के साथ साथ प्रतिस्पर्धा के युग में मनुष्य कब तनाव में चला जाता है इसका पता ही नहीं लगता।अनेक बार व्यक्ति सफलता की सीढ़ियों के बिल्कुल निकट पहुंचकर भी फिसल जाता है और तब आरम्भ होता है अवसाद का दौर और नशे की और आकर्षण।यदि ऐसे समय में कोई सँभालने वाला न हो तो मनुष्य किसी भी कुमार्ग पर जा सकता है। आज एक ऐसे युवक की कहानी आपको बताता हूँ जो एक निजी विद्यालय में शिक्षक था और कोरोना के समय के कुछ समय पश्चात नौकरी छूट गई सरकारी नौकरी के लिए प्रयास किया और वहां पर भी अंतिम चरण में असफल होने पर बहुत दुःख हुआ और अवसाद एवं तनाव को कम करने के लिए नशे का शिकार हो गया।घर वालों ने बहुत समझाया लेकिन उनकी एक न चली। नशे की लत में वह नशीले टीके तक लगाने लगा था। घर वालों ने निजी संस्थानों में बहुत उपचार भी करवाया लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ बल्कि तन-मन और धन का शोषण हुआ। और एक दिन ऐसा आया कि ड्रग्स ने उसके प्राण हर लिए। एक ऐसे युवक के जीवन का अंत हुआ जो स्वयं एक शिक्षक था।जो अन्य लोगों के जीवन में प्रकाश करने का कार्य करता था लेकिन नशे ने उसे एक स्थिति में खड़ा कर दिया था। उस युवक ने नौकरी न मिलने के कारण नशे को अपना साथी बना लिया था।ये कहानी न केवल उस युवक की है जिसने नशे में पड़कर अपने जीवन को समाप्त किया अपितु और भी ऐसे बहुत युवक हो सकते हैं जो असफलता के कारण नशे का शिकार हो जाते हैं।आज इस बात की आवश्यकता है कि शिक्षा नीति में नैतिक मूल्यों पर आधारित शिक्षा प्रणाली को जोड़ा जाए और प्रत्येक कक्षा के पाठ्यक्रमों में स्थान दिया जाए।इतना ही नहीं नशे का शिकार हो चुके लोगों के पुनर्वास की सुव्यवस्था की जाए।

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आज से हुआ 37वें अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेले का आगाज़: मनीषा सक्सेना

फरीदाबाद/सूरजकुडं, 01 फरवरी भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की सचिव वी.मनीषा ने कहा कि 37वां सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेला-2024, 02 फरवरी से 18 फरवरी, 2024 […]

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ब्रह्मलीन त्यागमूर्ति स्वामी गणेशानंद गिरि एवं स्वामी कृष्णानंद की पुण्यतिथि गायत्री महायज्ञ के साथ मनाई

वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक कुरुक्षेत्र: धर्मनगरी कुरुक्षेत्र में श्री महाभारतीय संस्कृति अनुसंधान न्यास श्री कृष्ण धाम के परमाध्यक्ष आचार्य महामंडलेश्वर 1008 स्वामी प्रेमानंद गिरि जी […]

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पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारों में जाने के लिए श्रद्घालु आवेदन किए आमंत्रित

वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक कुरुक्षेत्र 28 जनवरी: उपायुक्त शांतनु शर्मा ने कहा कि ऐसे श्रद्धालु व जत्थे जो कि महाराजा रणजीत सिंह जी की पुण्यतिथि […]

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जाने कैसी रही G-20 के दौरान मोदी-सुनक की पहली मुलाक़ात पीएम ने गुजरात से रेलवे को दी 2900 करोड़ की सौगात ब्रिटेन के अलावा इन 7 देशों की कमान संभाले हुए हैं भारतवंशी
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